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Hathras: राखी का महत्व… रक्षाबंधन के बाद राखी का क्या करें रखें या फेंकें?

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UP/ Hathras पंडित मुकेश शास्त्रीहाथरस। भाई और बहन के अटूट प्यार व विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का पावन पर्व हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और उनकी सुख-समृद्धि व दीर्घायु की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहनों को उपहार देकर जीवनभर उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। अक्सर देखा जाता है कि रक्षाबंधन बीतने के बाद लोग राखी को खोलकर इधर-उधर फेंक देते हैं।
      सोमवार को रक्षा बंधन और रक्षा सूत्र के बारे में जानकारी देते हुए विख्यात पंडित मुकेश शास्त्री जी ने बताया कि, शास्त्रों में राखी को इधर-उधर फेंकना अत्यंत अशुभ माना गया है, जिसका सीधा नकारात्मक प्रभाव भाई के जीवन पर पड़ सकता है। राखी खोलने और विसर्जन के नियम के बारे में आचार्य ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार रक्षा सूत्र को कम से कम सावन पूर्णिमा से लेकर भाद्रपद (भादों) पूर्णिमा तक यानी एक महीने तक कलाई पर बांधकर रखना चाहिए। परंपराओं के अनुसार राखी को विजयादशमी (दशहरा) के दिन खोलना सबसे उत्तम माना जाता है। उन्होंने कहा कि यदि आप 1 महीने तक राखी नहीं पहन सकते, तो इसे आदरपूर्वक खोलकर बहते जल में प्रवाहित कर दें या फिर अपने घर के पूजा स्थल पर रख दें। यदि राखी बीच में ही टूट जाए या खंडित हो जाए, तो एक रूपये का सिक्का और राखी किसी लाल कपड़े में बांधकर रख लें और आने वाली पूर्णिमा के दिन जल में प्रवाहित करें। आचार्य ने बताया कि रक्षा सूत्र में देवी-देवताओं का आशीर्वाद समाहित होता है। इसे कभी भी कचरे में न डालें और न ही पैरों के नीचे आने दें।

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