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सांसद–सपा नेता की बढ़ती नज़दीकियों ने बढ़ाया सियासी ताप

 आगामी चुनावों से पहले ‘भीतरघात’ की संभावनाओं पर चर्चाएं तेज़

हाथरस। जिले की राजनीति इन दिनों ऐसे खौल रही है मानो गरम तवे पर मसाले का छींटा पड़ गया हो। हाथरस सांसद और सासनी के एक सक्रिय समाजवादी पार्टी नेता जो कथित तौर पर सिकंद्राराऊ विधानसभा से  समाजवादी पार्टी से टिकट मांगने की तैयारी में हैं की बढ़ती मुलाक़ातों ने सियासी बाजार में चर्चा का अलग ही ताप पैदा कर दिया है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मुलाक़ातें अब महज़ संयोग नहीं लगतीं, क्योंकि कई बार दोनों को एक ही स्थान पर देखा गया है।स्थानीय लोगों  का कहना है कि इन मुलाकातों के सूत्रधार भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री व वर्तमान में भाजपा के स्नातक मतदाता अभियान के संयोजक है।सूत्र तो ये भी बताते है कि इन मुलाकातों के सूत्रधार भाजपा जिलाध्यक्षी के आगामी प्रबल दावेदार भी है।  
चर्चा यह भी है कि सपा नेता का सोशल मीडिया अकाउंट इन मुलाक़ातों को बेआवाज़ तरीके से दर्ज करता जा रहा है।
कहा जा रहा है कि जब भी सांसद सासनी क्षेत्र के कार्यक्रमों में पहुंचते हैं, सपा नेता के कार्यालय पर भी  मौजूदगी  अक्सर नोट की जाती है।
हालाँकि इस पैटर्न की किसी भी पक्ष ने न पुष्टि की है और न ही खंडन लेकिन राजनीतिक कैफे, चौपाल और बाज़ार में लोग इसे लगातार जोड़कर देख रहे हैं।
भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भी खामोश सी बेचैनी देखी जा रही है। कुछ इसे सियासी शिष्टाचार बताते हुए नजरअंदाज कर रहे हैं, लेकिन कई इसे आगामी चुनावों से पहले किसी नए “स्क्रिप्ट” या संभावित “भीतरघात” की चर्चा का आधार मान रहे हैं। विशेष रूप से यह सवाल उठ रहा है कि यदि सपा नेता भविष्य में टिकट पाकर चुनाव लड़ते हैं, तो व्यक्तिगत नज़दीकियों का सियासी असर किस दिशा में जाएगा ,यह अभी भी अटकलों का विषय बना हुआ है। बीजेपी के किसी भी वरिष्ठ नेता ने इस पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
राजनीतिक विश्लेषक हल्के-फुल्के तंज़ में कह रहे हैं कि हाथरस की सियासी रसोई में शायद कोई नया पकवान चढ़ा है, जिसकी महक जनता तक धीरे-धीरे पहुँच रही है।
न तो भाजपा और न ही सपा ने किसी रणनीति का खुलासा किया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में “अनदेखी नज़दीकियों” की कहानियाँ गर्म चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
फिलहाल पूरा मामला अनुमानों का तड़का ही है, लेकिन मुलाक़ातों की बढ़ती आवृत्ति ने उत्सुकता को चरम पर पहुँचा दिया है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि यह सियासी कैमिस्ट्री महज़ संयोग निकलेगी या फिर चुनावी मौसम में कोई बड़ा मोड़ लेकर सामने आएगी यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

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