यमुना नदी की तलहटी में मौजूद भूजल अब पीने योग्य नहीं रह गया है। हालिया जांच रिपोर्ट में पानी में प्रदूषण की मात्रा मानकों से अधिक पाई गई है, जिससे स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि पानी में घुलित ठोस पदार्थ, हानिकारक रसायन और बैक्टीरिया की मात्रा सुरक्षित सीमा से ज्यादा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि लंबे समय से यमुना में गिर रहे औद्योगिक कचरे और घरेलू सीवेज का असर अब भूजल पर भी साफ नजर आने लगा है। कई इलाकों में हैंडपंप और कुओं का पानी बदबूदार हो गया है, जिससे लोग मजबूरन वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर हो रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। जल गुणवत्ता की विस्तृत जांच कराई जा रही है और प्रदूषण फैलाने वालों पर कार्रवाई के साथ-साथ शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।




