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एक्सिस बैंक की मैम्बर आईडी एक्सप्रेस मनी पेमेंट बताकर एप के जरिये ठगी करने वाला एक गिरफ्तार, 1.4 लाख रुपये बरामद

रिपोर्ट – हाथरस से जिला ब्यूरो चीफ बलकेश कुमार कि खास खबर

-एसपी के निर्देश में साईबर क्राइम पुलिस आप्रेशन प्लानिंग के तहत की बड़ी कार्यवाही

हाथरस। अवगत कराना है कि दिनांक 17 फरवरी 2025 को वादी अजय कुमार पुत्र गंगा प्रसाद निवासी नगला राम सिंह ममौता कला थाना सासनी द्वारा लिखित तहरीर के माध्यम से सूचना दी कि दिनांक 30 अक्टूबर 2024 को दीपिका साहू नाम से एक महिला ने फोन कर बताया कि एक्सिस बैंक की मैम्बर आईडी एक्सप्रेस मनी पेमेंट एप के माध्यम से पैसों का लेन देन करने पर आपको अच्छा कमीशन दिया जायेगा । जब एप्प के माध्यम से मैने लेन देन शुरू किया तो पैसे नहीं डालने के बाद निकासी नहीं हुई जिसके सम्बन्ध में बात करने पर बताया कि 60 हजार रूपये की लिमिट पूरी होने के बाद निकासी होगी । 60 हजार रूपये डालने के बाद भी निकासी ना होने पर वादी को जानकारी हुई कि उसके साथ फ्राड हो गया है । तथा वादी के मिलने वाले भूपेन्द्र सिंह पुत्र सुखवीर सिंह निवासी गिरधर पुर थाना हसायन के साथ भी इसी प्रकार 60 हजार रूपये का फ्राड हुआ है । पुलिस अधीक्षक द्वारा उक्त घटना को गंभीरता से लेते हुए अपर पुलिस अधीक्षक हाथरस के निर्देशन एवं क्षेत्राधिकारी नगर के नेतृत्व में थाना साइबर क्राइम पुलिस को घटना के अनावरण व अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु निर्देशित किया गया था । जिसके क्रम में थाना साइबर क्राइम पुलिस टीम ने एक अभियुक्त को हाथरस जंक्शन रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया है । जिसके कब्जे से तीन आधार कार्ड, दो चैक बुक, दो मोबाईल (स्मार्टफोन), दो एटीएम कार्ड, एक लाख चार हज़ार रूपये नगद बरामद हुए । पुलिस ने अभियुक्त संदीप शर्मा पुत्र महेन्द्र शर्मा निवासी त्यागी नगर थाना मुरार जनपद ग्वालियर मध्य प्रदेश को पकड़ कर खुलासा किया है।

ये है महत्वपूर्ण तथ्य :

अभियुक्तगण द्वारा विशेष रूप से जनसेवाकेन्द्र संचालकों को टारगेट कर उनको फोन कर मनी एक्स्प्रेस के नाम से अपनी कम्पनी बताते थे और अपनी वैवसाइट के बारे में भी बताते थे । तथा उनको अपनी कम्पनी द्वारा अच्छा कमीशन, देश व विदेश घूमने की ट्रिप (होली-डे) जैसे लोभ लुभावने ऑफर देते थे और अपनी वैवसाइट को गूगल पर सर्च करने की कहते थे । गूगल पर सर्च करने पर रूपये ट्रांसफर व मोबाइल रीचार्ज, डीटीएच रीचार्ज आदि करने की फर्जी वैवसाइट खुल जाती थी, और शातिर अभियुक्तगणों द्वारा वास्टएप के माध्यम से अपनी लिंक फाइल भेजकर मोबाइल में एप्प इंस्टाल करा दिया जाता था और उस एप द्वारा लेन – देन करने पर रूपये जमा होते रहते थे परन्तु रूपयों की निकासी नहीं होती थी । रूपये निकालने के सम्बन्ध में अभियुक्तगण द्वारा बताया जाता था कि जब आपके एप में 60 हज़ार रूपये या इससे अधिक हो जायेंगे तब आप रूपयों की निकासी कर सकते हो । जब एप्प में 60 हजार या उससे अधिक रूपये होने पर एप से जुडे हुये अभियुक्तगण के खाते में सारे रूपये ट्रांसफर हो जाते थे, रूपये ट्रांसफर होते ही एप ब्लॉक हो जाता था ।
उक्त घटना में तीन अन्य अभियुक्त प्रकाश में आये है । पुलिस द्वारा शेष अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु टीम गठित कर सार्थक प्रयास किये जा रहे है ।

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