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कोयले के दामों में लगी आग, झुलस रहा ईंट-भट्ठों का कारोबार

हाथरस। जिले में ईंटों के कारोबार पर महंगाई की मार पड़ने लगी है। कोयले के दामों में अचानक आई तेजी के चलते ईंटों की कीमत बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे मकान बनाना महंगा हो सकता है। व्यापारियों के अनुसार कोयले की आपूर्ति इंडोनेशिया और अमेरिका से होती है, लेकिन खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के कारण इसकी सप्लाई प्रभावित हो गई है। पहले जो कोयला 16 रुपये प्रति किलो तक मिल रहा था, वह अब बढ़कर 24 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इस महंगाई का मुख्य कारण भाड़े में बढ़ोतरी भी है। जानकार बताते हैं कि कोयला आयात करने वाले जहाजों को वापसी में पर्याप्त माल नहीं मिल पा रहा, जिससे माल भाड़ा भी काफी बढ़ गया है। इसका सीधा असर कोयले की कीमतों पर पड़ा है। इसका भार अब ईंट भट्ठा संचालकों पर पड़ रहा है। भट्ठा संचालक भी इसकी भरपाई ईंटों के दाम बढ़ाकर करने पर मजबूर हो गए हैं, जिसका असर निश्चित रूप से मकान बनाने वालों पर पड़ा है।


ईंट-भट्ठों में बढ़ी उत्पादन लागत

हाथरस। जिले में करीब 180 ईंट भट्ठे संचालित हैं, जिनमें से लगभग 120 जिक-जैक तकनीक से चलते हैं। इस तकनीक में कोयले का अधिक उपयोग होता है, जिससे लागत में सीधा इजाफा हो रहा है। अब तक छह से सात रुपये की दर से बिकने वाली ईंट की कीमत बढ़कर करीब आठ रुपये तक पहुंच सकती है।


जीएसटी बढ़ने से और दबाव

हाथरस। कोयले पर जीएसटी की दर पांच से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे भट्ठों में ईंटों की उत्पादन लागत और बढ़ गई है। इससे ईंटों के दाम बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।


वरिष्ठ ईंट-भट्ठा कारोबारी का कहना

हाथरस। वरिष्ठ ईंट-भट्ठा कारोबारी कमल गोयल का कहना है कि इस समय ईंट भट्ठा कारोबार दोहरी मार झेल रहा है। जीएसटी की ओर से पहले ही भट्ठों पर बोझ डाला जा चुका है। अब कोयले के दामों में इतना अधिक इजाफा हुआ है कि लागत बहुत अधिक महंगी हो गई है। अब कारोबार काफी जोखिम भरा हो गया है।

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