हाथरस। जनपद के बाण अब्दुल्लहईपुर ब्लॉक हसायन तहसील सिकंद्राराऊ क्षेत्र में चकबंदी प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश दिखाई दे रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि चकबंदी अधिकारियों द्वारा गलत तरीके से नापजोख की गई है, जिसके कारण कई किसानों की पैतृक भूमि में कटौती कर दी गई है और कई खेतों को अलग सेक्टरों में जोड़ दिया गया है। ग्रामीणों द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया गया है कि गाटा संख्या 206, 207, 208, 210 और 211 की जमीन को अधिकारियों ने गलत सेक्टर में दर्ज कर दिया है. प्रार्थीगणों का कहना है कि उनकी जमीन को सेक्टर-167 से हटाकर सेक्टर-20 में जोड़ दिया गया, जबकि ग्रामीणों की सहमति के बिना यह परिवर्तन हुआ है। शिकायतकर्ताओं रमेश काश्यप, उनकी पत्नी कुसुमा देवी और अन्य परिवारजन का आरोप है कि नाप-जोख बिना सूचना और बिना उचित प्रक्रिया के की गई, जिससे उनके पुश्तैनी खेतों में भारी कटौती हो गई। ग्रामीणों ने कहा कि वे इस मामले की शिकायत कई बार चकबंदी विभाग, PWD गेस्ट हाउस में स्थित चकबंदी अधिकारी तथा हल्का सेलेटर से कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। पूर्व उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि 24 नवंबर 2025 तक गलत नाप-जोख को सही नहीं किया गया, तो वे नलकूप संख्या 206 के समीप आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर होंगे, जिसकी समस्त ज़िम्मेदारी प्रशासन की होगी. जब उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 24 नवंबर सोमवार से ग्रामीण पूर्व घोषणा के अनुसार आमरण अनशन पर बैठ गए हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी जमीन की नाप-जोख दोबारा कराई जाए और सेक्टर-23 के बजाय इसे मूल सेक्टर-30 में दर्ज किया जाए, ताकि उनकी वर्षों पुरानी कृषि भूमि सुरक्षित रह सके.
चकबंदी संबंधी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर रसूलपुर में ग्रामीण बैठे आमरण अनशन पर
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