एक बहुत पुरानी कहावत है माता-पिता बनना तो आसान है लेकिन उन जिम्मेदरियों को निभाना शायद इस दुनिया की सबसे मुश्किल चीज है। दरअसल अभिभावक होने जैसी बड़ी जिम्मेदारी का कोई अंत नहीं है….जिसकी शुरुआत बच्चे के जन्म से ही हो जाती है और जब तक माता-पिता जीवित है वह इस जिम्मेदारी से मुंह मोड़ ही नहीं सकते।
हाइलाइट्स
- आजकल के अभिभावक बहुत फ्रेंडली और एक्सप्रेसिव हो गए हैं, वे अपने इमोशन को आसानी से कह सकते हैं
- बच्चे बहुत कोमल होते हैं और वे इस बात को अच्छी तरह समझ पाते हैं कि कौन उनसे प्रेम कर रह है और कौन प्यार करने का दिखावा।
- सद्गुरु कहते हैं अगर आप इंटेलिजेंट व्यक्ति के रूप में उभरकर आएंगे तो वे आपसे प्रभावित होंगे और उनके साथ आपकी नजदीकी भी बढ़ जाएगी।
आजकल के पैरेंट्स पहले के दौर के माता-पिता से बहुत अलग है, मुझे लगता है बहुत हद तक उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का अहसास भी है, अब ऐसा भी नहीं है कि हमारे माता-पिता रिस्पॉंसिबल नहीं थे या उन्होंने अपनी जिम्मेदारियां सही तरीके से नहीं निभाई, कहने का अर्थ यह है कि आजकल के अभिभावक बहुत फ्रेंडली और एक्सप्रेसिव हो गए हैं, वे अपने इमोशन को आसानी से कह सकते हैं और उनकी देखा देखी उनके बच्चे भी आसानी के साथ उन्हें अपने दिल की बात बताने में कामयाब हो जाते हैं। लेकिन हमेशा कुछ ना कुछ कमी रह ही जाती है…. आपके और आपके बच्चे के बीच किसी तरह की कमी ना रहे इसके लिये सद्गुरु कुछ बेहद हारगर और आसान टिप्स दे रहे हैं। प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु आज के समय में सबसे ज्यादा बात स्वीकृत हैं.. उनकी बातें हर उम्र के लोग सुनते भी हैं और उनका अनुसरण भी करते हैं। तो चलिये जानते हैं आजकल के अभिभावकों को सद्गुरु क्या सीख दे रहे हैं।
उन्हें प्यार करें, दिखावा नहीं
बच्चे बहुत कोमल होते हैं और वे इस बात को अच्छी तरह समझ पाते हैं कि कौन उनसे प्रेम कर रह है और कौन प्यार करने का दिखावा। अगर आप चाहते हैं आपका बच्चा आपके साथ अपनी अच्छी बॉंडिंग रखे तो आपको उन्हें सच्चा प्रेम देना चाहिये। सद्गुरु भी इस बात पर मोहर लगाते हुए कहते हैं कि बच्चे की हर डिमांड को पूरा करना उन्हें प्यार करना नहीं है, हर मौके पर उनके लिये उपस्थित होना उन्हें सच्चा प्यार करना है। जब उन्हें आपकी जरूरत हो, अगर तब आप अवेलबल रहते हैं तो यही उन्हें वास्तविक रूप से प्रेम देना है।
बच्चे को हर अवसर पर सपोर्ट करना सीखें
सारी दुनिया भले ही आपके बच्चे के विरोध में हो लेकिन जब उसके अभिभावक उसके साथ होते हैं तो उसे कोई समस्या नहीं होती। सद्गुरु कहते हैं माता-पिता को अपने बच्चे का समर्थन करना चाहिये… गलतियां तो हर किसी से होती है लेकिन आपको अपने बच्चे को उस गलती करने और उससे सबक सीखने के लिये तैयार करना चाहिये। अभिभावकों को अपने बच्चे को सपोर्ट करना चाहिय, उसे समर्थन देना चाहिये तभी वह लाइफ में स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम रहेगा।
घर का माहौल सकारात्मक रखें
बच्चे का सबसे पहला स्कूल उसका घर ही होता है… अगर आप चाहते हैं आपका बच्चा अच्छी बातें सीखें, उसका स्वभाव पॉजिटिव हो तो सबसे पहले आपको अपने घर का माहौल ठीक करना चाहिये। पति-पत्नी को आपस में अपने संबंध को मधुर बनाना चाहिये। अगर आप हर समय अपने बच्चे के सामने चिंतित या डरे हुए या फिर क्रोधित रहेंगे तो आप खुद ही सोचिये कि माहौल बेहतर कैसे होग,सद्गुरु कहते हैं बच्चे बहुत जिज्ञासु होते हैं और उन्हें भीतर बहुत से सवाल होते हैं। अगर आप उनके सामने इंटेलिजेंट व्यक्ति के रूप में उभरकर आएंगे तो वे आपसे प्रभावित होंगे और उनके साथ आपकी नजदीकी भी बढ़ जाएगी। बच्चों का प्यार उनके माता-पिता के लिये पर्याप्त है… कुछ ऐसा ही अभिभावकों के प्रेम और दुलार के साथ भी है। अगर आप अपने बच्चे को समझेंगे और उसे चीजों को समझाएंगे तो उन्हें किसी और की कंपनी की जरूरत ही नहीं होगी।














