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निबंधन विभाग के निजीकरण के विरोध में आंदोलन 18वें दिन भी जारी, विभिन्न संगठनों ने दिया समर्थन

हाथरस। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निबंधन विभाग के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं टाइपिस्टों का संयुक्त आंदोलन शनिवार को 18वें दिन भी जारी रहा। उप-पंजीयक कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने दोहराया कि जब तक निजीकरण का प्रस्ताव पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रहेगा।धरना स्थल पर पहुंचे  चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य, जिला उपाध्यक्ष नवेद अहमद खान एवं अन्य कांग्रेस पदाधिकारियों ने आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि निबंधन विभाग का निजीकरण जनहित और रोजगार दोनों के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने सरकार से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए प्रस्ताव वापस लेने की मांग की।इस दौरान जय जवान किसान नौजवान संविधान पार्टी तथा किसान सभा के प्रतिनिधियों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव ब्रजमोहन मदनावत और जिला महामंत्री शिव नंदन ने कहा कि निजीकरण से आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा और हजारों अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं टाइपिस्टों की आजीविका प्रभावित होगी।धरना सभा की अध्यक्षता केदार सिंह यादव ने की, जबकि संचालन दी बार एसोसिएशन के सचिव राजेश बघेल एडवोकेट ने किया। दी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं आंदोलन के संरक्षक डी.के. चौहान ‘शोला’ एडवोकेट ने कहा कि यह आंदोलन केवल अधिवक्ताओं का नहीं, बल्कि आम जनता के अधिकारों, रोजगार की सुरक्षा और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने का संघर्ष है।आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र ही निजीकरण का प्रस्ताव वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं निर्णायक स्वरूप दिया जाएगा।धरना-प्रदर्शन में युवराज सिंह चौहान, गौरी शंकर गुप्ता, इंद्रपाल सिंह यादव, महेंद्र सिंह यादव, जय प्रकाश गुप्ता, अरविंद कुमार शर्मा, रंजीत पौरुष, गिरीश यादव, विजय उपाध्याय, रूपेंद्र बघेल, अजीत चौहान, प्रियांशू दरगढ़, दीपेश पाठक, आनंद कुमार, कोमल सिंह, राशिद अहमद, हरीओम उपाध्याय, देवेंद्र कुमार संत सहित अनेक अधिवक्ता एवं आंदोलनकारी मौजूद रहे।——–

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