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बैंकिंग सुधारों एवं लंबित मांगों को लेकर बैंक कर्मियों की देशव्यापी हड़ताल ,जोरदार प्रदर्शन

हाथरस। दिनांक 27 जनवरी 2026 को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के आह्वान पर बैंकिंग उद्योग से जुड़े 9 घटक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में देशभर में अखिल भारतीय हड़ताल आयोजित की गई। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक, क्षेत्रीय कार्यालय, अलीगढ़ रोड, हाथरस के समक्ष बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा जोरदार प्रदर्शन किया गया।
हड़ताल का उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों की लंबित और न्यायोचित मांगों को शीघ्र पूरा कराना है।इसके अतिरिक्त, प्रदर्शनकारियों ने यह भी बताया कि 08 मार्च 2024 को इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) एवं चार अधिकारी संगठनों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MOU) में छह माह के भीतर लंबित मुद्दों के समाधान का आश्वासन दिया गया था। इन मुद्दों में 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह, विनियमित कार्य घंटे, कर्मचारियों/अधिकारियों को PLI, पेंशन का अद्यतन, प्राइवेट सेक्टर बैंकों में सेवानिवृत्त कर्मियों को अनुग्रह राशि का भुगतान तथा अन्य सहमत विषय शामिल हैं, किंतु आज तक इन पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। उल्लेखनीय है कि UFBU द्वारा पूर्व में 24 एवं 25 मार्च 2025 की हड़ताल सरकार एवं IBA के प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए आश्वासन पर स्थगित की गई थी, परंतु आश्वासनों के बावजूद मांगों के समाधान में कोई प्रगति नहीं होने के कारण संगठन को 27 जनवरी 2026 को पुनः एक दिवसीय हड़ताल करने के लिए विवश होना पड़ा । जिसमें यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन द्वारा अखिल भारतीय हड़ताल कार्यक्रम उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक क्षेत्रीय कार्यालय अलीगढ़ रोड हाथरस पर रखा गया जिसमें यूनियनों के अनुसार, उनकी मुख्य मांग है कि सरकार सभी शनिवार को बैंकों की छुट्टी घोषित करें, ताकि बैंकिंग सेक्टर में पांच दिन काम और दो दिन छुट्टी की व्यवस्था लागू हो सके। यूएफबीयू ने बताया कि इंडियन बैंक्स एसोसिएशन पहले ही इस प्रस्ताव को सरकार के पास भेज चुकी है। यह सिफारिश 7 दिसंबर 2023 को आईबीए और यूएफबीयू के बीच हुए समझौते पर आधारित है, जिसके बाद 8 मार्च 2024 को समझौता और संयुक्त नोट जारी किया गया था। हालांकि, यूनियनों का कहना है कि यह प्रस्ताव अभी तक सरकार और बैंकिंग नियामकों की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा है।
जिला संयोजक पुष्पांकर जैन ने यह भी स्पष्ट किया कि पांच दिन काम करने की मांग कोई नई मांग नहीं है। इसकी शुरुआत 2015 में हुई थी, जब बैंकों में हर महीने दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी दी जाने लगी थी। तब से लेकर अब तक आईबीए के साथ कई दौर की बातचीत हो चुकी है और कई मुद्दों पर सहमति भी बनी है। यूनियनों ने यह भी सहमति दी है कि अगर पांच दिन काम की व्यवस्था लागू होती है, तो वे रोजाना काम के समय में करीब 40 मिनट की बढ़ोतरी करने को तैयार हैं, ताकि कुल साप्ताहिक काम के समय में कोई कमी न आए। इसके बावजूद, यूनियनों का कहना है कि पिछले नौ महीनों से कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। बातचीत के दौरान दिए गए आश्वासनों के बाद भी फैसला न होने के कारण यूनियनों को दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। उन्होंने बताया कि पांच दिवसीय बैंक के अलावा पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को लेकर अधिकारी व कर्मचारी राष्ट्र स्तर पर शीघ्र धरना प्रदर्शन व हड़ताल पर जाने वाले हैं l
इस मौके पर प्रमुख रूप से यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के जिला संयोजक पुष्पांकर जैन, उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक ऑफिसर यूनियन जिला अध्यक्ष संजीव विश्वावत, अधिकारी यूनियन के ए आर एस सौरभ राजपूत, जिला मंत्री विष्णु चौधरी व यूपी बैंक एम्पलाई यूनियन जिला मंत्री राजेंद्र सिंह, यूपी बैंक एम्पलाई यूनियन सयुक्त मंत्री निशांत वार्ष्णेय, राजकुमार चौधरी , के डी सी गुप्ता, जी के शर्मा, बी के शर्मा, अमर सिंह, बी पी अग्रवाल , प्रदीप , दिलशाद , राहुल चौधरी , भरत , गोपाल स्वरूप ,प्रदीप वार्ष्णेय , राजकुमार शर्मा, रामप्रकाश यादव , राजपाल , सुरेश वर्मा , जगमोहन , रामकुमार, रमाकांत , शंकरलाल ,जितेंद्र , देवेंद्र गौतम , अंजलि. , मांडवी , नेहा आदि सम्मिलित हुए l

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