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कृषि ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का अवैध धंधा, लाखों के राजस्व की हानि

कृषि कार्य के नाम पर पंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का अब अवैध कारनामा

हाथरस। व्यवसायिक दुरुपयोग हो रहा है। इन वाहनों से बड़े पैमाने पर ईंटों बिल्डिंग मैटेरियल, लकड़ी और लोहे आदि की ढुलाई का धंधा चलाया जा रहा है। इस अवैध गतिविधि से सरकार को लाखों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है,
वहीं ओवरलोड वाहन सड़कों की सेहत खराब करने और आम लोगों की जान को जोखिम
में डालने का काम कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रशासन और परिवहन
विभाग इस सबके बीच तमाशबीन बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि रास्ते
में विभिन्न स्थानों पर पुलिस पिकेट होने के बावजूद, चार पहिया ट्रॉलियां बिना किसी रोक-टोक के आवाजाही कर रही हैं। स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभाग के अधिकारियों ने इस अवैध गतिविधि पर आंखें मूंद रखी हैं। जबकि
नियम स्पष्ट है। व्यावसायिक उपयोग के लिए कृषि पंजीकृत
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को संबंधित एआरटीओ कार्यालय में व्यावसायिक वाहन के
रूप में पंजीकृत कराना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया में वाहन का बीमा और फिटनेस प्रमाणपत्र लेना भी शामिल है, जिससे ट्रैक्टर मालिकों की जेब ढीली
होती है। इसीलिए वे अवैध तरीके से कृषि वाहनों का दुरुपयोग कर रहे हैं। अगर परिवहन विभाग इस ओर गंभीरता से ध्यान दे तो सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी हो सकती है। अवैध ढुलाई करने वाले ये ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां
न सिर्फ सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं, बल्कि सड़कों को भी बर्बाद कर रहे हैं। भारी भरकम वाहनों की वजह से बनी-बनाई सड़कें भी जल्द ही
टूटने की कगार पर पहुंच जाती हैं। आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं के बावजूद
अभी तक इन अवैध वाहनों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं दिख रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारियों की मिलीभगत से यह सब हो रहा है।
यही वजह है कि सारी जानकारी होने के बाद भी प्रशासन हरकत में नहीं आ रहा है। आखिर कब तक आम लोगों की सुरक्षा से खिलवाड़ होता रहेगा? कब तक सरकारी राजस्व का नुकसान होता रहेगा? इन सवालों के जवाब तलाशने की जरूरत है।

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