हाथरस। मंदिर श्री कन्हैयालाल रुई मंडी के 170 वें बार्षिकोत्सव पर एम के साहित्य अकादमी पंचकूला तथा बृज कला केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में कविताओं का प्रभावपूर्ण प्रस्तुतीकरण हुआ
कार्यक्रम का शुभारंभ अध्यक्ष राजकुमार कोठीवाल ने कार्यक्रम अध्यक्ष संजीव वर्मा से बिशिष्ट अतिथि सबरस मुरसानी,
पं मदन मोहन गौड, सत्यप्रकाश रंगीला, डा जितेन्द्र शर्मा, विजय सिंह प्रेमी आदि के सानिध्य में फीता कटवाकर किया। आशु कवि अनिल बौहरे ने संचालन करते हुए कवयित्री मीरा दीक्षित की सरस्वती वंदना प्रस्तुति से कार्यक्रम प्रारंभ करवाया। कवियों का सम्मान संजीव वर्मा, रेखा वर्मा आदि ने किया। कवियों ने काव्यपाठ यूं किया
डा प्रतिभा माही पंचकूला ने पढा
मैं राधा की दीवानी,उससे मेरा नाता, गोकुल का कान्हा मुझको खुद बुलाता, डा संगीता शर्मा कुन्द्रा गीत चण्डीगढ़ राधा हुई बाबरी,सुन मुरली की तान
सुध बुध सिगरी खो गई,रहा न कुछ भान डा मुकेश कबीर भोपाल भारत के रहने बाले, महिमा भारत की गावेगे।
चाहे कैसा भी कष्ट मिले जन्म यहीं चाहेंगे, विशेष आजाद देहली, श्रवण बेटा कहे बटबारे में सब कुछ ले लो, मेरे हिस्से मुझको मेरे मां बाप दे दो सुखप्रीत सिंह सुक्खी
किसी को शौहरत ने मारा
मुझे मेरी ही औरत ने मारा संगीता राज देहली
कान्हा मोसो हास परिहास करै
गीतू महेश्वरी अलीगढ़
बन गई मैं जोगन तिहारी पिया
संस्कार भारती के जिलाध्यक्ष चेतन उपाध्याय
हर शख्स कह रहा शान से
मुझे है प्यार हिन्दुस्तान से
सोनाली बार्ष्णेय
पत्थर दिल पिघलेगा,धोखे में नहीं रहना, बिना संघर्ष इन्साफ मिलेगा धोखे मे नही रहना चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य तथा राजकुमार कोठीवाल ने काका हाथरसी की रचनाओं का पठन किया। एम के एकेडमी पंचकूला ने संजीव वर्मा, राजकुमार कोठीवाल, चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य आदि के अलावा श्रेष्ठ काव्य श्रोता सम्मान पं रमेश चन्द्र ब्रह्मचारी,पं मदन मोहन मोहन गौड़ तथा विजय सिंह प्रेमी को प्रदान किया। इस अवसर पर सर्वश्री अतुल आंधीबाल, मुन्ना लाल अग्रवाल,रिंकू अग्रबाल, देवेश कौशिक, पवन पौरुष पहलवान,
विजय माथुर आदि उपस्थित थें।
मंदिर श्री कन्हैयालाल के170 वें बार्षिकोत्सव पर एम के साहित्य अकादमी पंचकूला तथा बृज कला केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में कन्हैया के नाम कवि सम्मेलन ने रंग जमा दिया




